Saturday, 24 October 2020

Self Confession with a general Thought

 I'm not perfect

Also I don't say as I'm a good person..

I have many evils nd bad things within me..

I'm not always right .. 

But I've feeling nd sentiments nd always trying to understand respect other's emotions nd sentiments  so that it always let me try to do good deeds nd intend me to have good thinking. I do mistakes but I never ever do any crime.

[The same as in general, if everyone can try to understand and respect each other's sentiments then all realtions will tie in a tough knot] , 

these are simple words nd everyone knows but have importance to all bcz often it is  unknowingly ignored by everyone and can't try to make it familiar in daily practical life. SO it's a practice of daily life not as only a quote..

#my_thought

#its_time_to_self_confession

Tuesday, 13 October 2020

Spread Love

 If you HATE someone,,

You tell it to everyone...!!

without any fear,,

But

If you LOVE someone,,

You fear even to tell the loved

one...!!

The Whole World is eager to receive pure Love....! 

We should distribute it without expecting anything in return.

Give it, 

with no desire for reciprocation..!!

(And it is a real Love) 

Thursday, 1 October 2020

Demolish your loneliness


If we have any goal to our life or able to find the motive of our life and always do actions to achieve that then we never feel alone or loneliness or worthless.


अगर हम अपने जीवन में कोई उदेश्य या लक्ष्य रखते हो या खुद को अपने जीवन के मकसद को पाने के काबिल समझ रहे हो और उसे हरपल पाने के लिए प्रयासरत हो तो हम कभी अपने आप को अकेला नहीं पाएंगे नहीं समझेंगे और नहीं खुद को निरर्थक या नाकारा महसूस होगा. 

Monday, 14 September 2020

मेरी याचना

 दे दे साथ अगर तू जिंदगी।

तो मुकम्मल जंहा ये होगा।।

तुझसे शिकवे गीले सब खाख होंगे।

बस ये इल्तिजा की मुझसे तू वफ़ा रख।।

मेरी कलम से

 हँसी है दुःखी है तो कहीं प्यार है, 

तो नाराजगी भी साथ है , 

कहीं मज़ाक है तो कहीं गुस्सा, 

तो लड़ाई तो कहीं प्यार वाली नोक झोंक भी, 

फिर भी सब साथ है 

कोई पास पास तो कोई दूर दूर.. 

क्यूँ, ये तो हक है जो बात खास है 

क्यूंकि हम सारे दोस्त है... 

 

ये नजर

खोजता रहा सुकून मैं दूर कहीं यिन खुले आँखों से

जब बंद हुयीं आंखे तो उसे तो मैं पास ही पाया.

ढूँढता रहा मैं खुशी कहीं और कहीं दूर

जब थक गया तो उसे अपने ही चारो ओर अपनों के बीच पाया.

ये नजर तो अपनी है पर दोष अक्सर इसके नजरिये की होती है जो चीज़ पास होती है उसे ही दूर कर देती है.

यादें

वक्त बेवक्त आती, वो पल अनमोल की 

हर वक़्त यादें।

मन को टटोलती, आंखों को भिगोती 

हर वक्त यादें।

दिल को बहलाती , खोये पल को फिर से बुलाती 

वक्त बेवक्त ये यादें।

गुजरे कल की किस्से कहती ये बोलती तश्वीरों से 

पल पल हर पल ये यादें।

जिसे चाहा जिसे जिया कौन रह पाया 

सिवाये  वक्त बेवक्त ये यादों के।

जीवन की कठोरता यादों की

मार्मिकता यही तो है नसीबों में ।

सुकून की तलाश

#सुकून_की_तलाश 
सुकून की तलाश मे
वो जो मेरी क्षमताओं और क़ाबिलियतों में निहित हो
ओ सुकून जो मेरी ऊर्जा शक्ति से पुष्पित हो
सुकून की तलाश में
ओ जो  मेरी असीम निर्मल इक्षाओं से निकली ज्वलंत हो
अपनों के आचल की छाँव में रह कर
अपनों की हर ख्वाहिश पूरा करने के लिए जीना
और खुद की वज़ूद को उड़ान देने की
वो सुकून जिसकी तलाश है अभी बाकी
हाँ मैं अभी अपनी क्षमताओं काबिलियतों वो ऊर्जा शक्ति वो निर्मल इक्षाओं को फिर से जगाने मे प्रयासरत हूं
हाँ मैं पूर्ण स्वस्थ होने की लालसा लिए जीवन से डटकर झुँझ रहा हूँ.
मुझे आशा और पूर्ण विश्वाश है  मुझे वो सुकून जरूर हासिल होगी,
जिसमें हर चीज़ निहित होगी खुद की पुरूषार्थ ऊपर वाले की चाहत और अपनों की दुआएँ.


Thursday, 19 December 2019

ये हमारे देश का दुर्भाग्य है यंहा पे ऐसे भी so called educated गवांर लोग है जो खुद को युवा और विद्यार्थी और खुद को देश का भावी भविष्य मानते है और वोट देके MLAs MPs तो चुन लेते है। और जब देश के संसद में कोई बिल लाई जाती है कुछ सुधार केलिए तो उस बिल पे पक्ष विपक्ष का विचार डिबेट डिस्कशन जो बिल पारित होने के दौरान होती है उसे सुनना तो दूर जानना तक नही चाहते यंहा तक कि उस बिल में क्या है उसे भी पूरी तरह से न जानना और न समझना चाहते है। और जब बिल पास हो जाये तब इनके अंदर का so called दिखावटी वाली क्रांतिकारीपन बाहर निकलता है जो देश मे अराजकता, अशांति, विध्वंश व देश समाज मे असमंजस और उसे बाटने के सिवाए कुछ और नही करते।

जब देश के head of the govnt Prime Minister Of India एक apeal करते हुऐ assure कर रहे है कि CAB
 इंडियन सिटीजन को और यंहा
के कोई भी रिलिजन पे कोई effect नही करेगा। और किसी भी इंडियन सिटीजन को किसी भी तरह का worry करने की जरूत नही है।। और बिल में भी ये clear cut में mention है की ये क्या है किसके लिए है क्यों है और कहा कहा पे अप्लाई किया जा रहा है।।

पर फिर भी ऐसे लोग violently प्रोटेस्ट कर रहे है अपने तरफ से कुछ भी assume करके।।
अगर future में affect पड़ता तब ऐसा protest करते तो थोड़ा जायज भी लगता एक दृश्टिकोण से पर फिर भी violently किसी भी तरह से जायज नहीं।

पर क्या पहले से कुछ भी assume करके right to speak के आर में कानून को नही मानना देश के constitution का दुहाई देने वालों द्वारा देश के constitution का अपमान है या नहीं,
क्योंकि
ये govnt एक constitutionally elected govt है और बिल भी संवैधानिक तरीके से
हमारे देश के constitutionally स्थापित दोनों सदनों के elcted MPs द्वारा overwhelming के साथ with required majority से पारित होके और president द्वारा approved होने के बाद एक constitutional कानून बना।।
क्या इसे नही मानना और violently protest करना unconstitutional नहीं है ?

अब ऐसे लोगो को बताना चाहिए कि गलत कौन है और गलती कौन कर रहा है।।
अगर ऐसे लोगो को इसमें कुछ खामिया दिखती भी है तो उसके लिए क्या वो govnt को कोई सुझावो दिए जिस आक्रोश से अभि प्रोटेस्ट कर रहे है उसी जज्बे से।। या सिर्फ vote देके MPs चुन के अपनी जिम्मेदारी  भूल गए सब तब उसी MPs वाली हमारी सदन में पारित होने के बाद उस बिल पे बोलने या कुछ करने का हक़ भी नही उन्हें।।

और अंत में किसी भी चीज का विरोध करने से पहले उसकी हर पहलू को जानना और समझना चाहिए।
ये CAB है क्या?
किसके लिए है?
क्यों लानी पर रही है?
ऐसी क्या प्रस्थिति बनी जो इनलोगो  के लिए अब ये व्यवस्था लायी जा रही है?
और ये कानून लाने केलिए क्या क्या मापदंड और क्या क्या शर्ते अपनाये जा रहे है?

ये सब बिना जाने किसी को कोई भी हक़ नही कुछ भी assume करके इस तरह विरोध करने का।
#I_Support_CAB

Wednesday, 23 October 2019

एक एहसास .....
अनगिनत किस्से थे हमारे आपके,
हर किस्से की शुरूआत थी आपसे,
ढेरों बाते थे कहने को  आपसे ,
पर न कह सके आपके  चले जाने से ,
आँखों ही आँखों में  टूट के बिखर गए सारे सपने ,
हम मिले भी नही जरा तबियत से और बिछड़ गए ....
एक बार जो हमने कभी हकीकत समझ लिया होता ,
तो आईने से इसतरह हम बात न करते ,
क्या खोया दिया है हमने ,
कास एक बार तो मिलकर हम बता पाते ....

Saturday, 14 September 2019


जो रिश्ते बिजली के चले जाने से वो पूरी रात छतों पे साथ गुजारना ।
अब दीवारों के बीच कैद होके रह गयी ।।
जो नींद एक दूसरे के थपकियों और किस्से कहानियों से आया करती थी ।
अब हाथों में थमे यंत्रों में सिमट के दम तोड़ दी ।।
जो कमरा सबको अपने मे समाये बड़ी इठलाता था ।
अब भवन हो के भी सबको खुद में सिमट न सका।।
बचपन मे बस किसीके साथ होने भर से, कोई अपना हो जाया करता था।
अब भावनाएं इस कदर रूठी की अपने होके भी अपनापन खो बैठे ।।
"रिश्तें तो प्यार से फलती फूलती है, प्यार एक दूसरे के त्याग से और त्याग एक दूसरे के प्रति भावनाओं से और सच्ची भावनाएं एक इंसान होने का पूरक है"
(कहीं न कहीं हम सब आदमियत से बैर कर बैठे है।) 

Saturday, 31 August 2019

ये जीवन


ये जीवन "मैं से हम" तक का ही सफर तो है।
ये जीवन "खोकर पाने" का ही पर्याय तो है।
जीवन एक खोज है उस "मैं में हम की खोज" ।
ये जीवन जन्म मरण के सफर
को "एक अर्थ की तलाश" ही तो है।
"प्रेम की वास्तविकता" ही तो इस जीवन का आधार है।
उस "मैं से हम के सफर का प्रेम" ही तो जीवन है।









Wednesday, 30 April 2014

एक बच्चे कि मासूम सवाल -"मनुष्य की क्या कीमत होती है ??"

लोहे की दुकान में अपने पिता के साथ काम कर रहे 
एक बालक ने अचानक ही अपने पिता से पुछा – 
“पिताजी इस दुनिया में मनुष्य की क्या कीमत होती है ?”

पिताजी एक छोटे से बच्चे से ऐसा गंभीर सवाल सुन कर 
हैरान रह गये.

फिर वे बोले “बेटे एक मनुष्य की कीमत आंकना बहुत 
मुश्किल है, वो तो अनमोल है.”

बालक – क्या सभी उतना ही कीमती और महत्त्वपूर्ण हैं ?

पिताजी – हाँ बेटे.

बालक कुछ समझा नही उसने फिर सवाल किया – तो
फिर इस दुनिया मे कोई गरीब तो कोई अमीर क्यो है ?
किसी की कम रिस्पेक्ट तो कीसी की ज्यादा क्यो होती है?

सवाल सुनकर पिताजी कुछ देर तक शांत रहे और फिर
बालक से स्टोर रूम में पड़ा एक लोहे का रॉड लाने को कहा.

रॉड लाते ही पिताजी ने पुछा – इसकी क्या कीमत होगी?
बालक – 200 रूपये.

पिताजी – अगर मै इसके बहुत से छोटे-छोटे कील बना दू
तो इसकी क्या कीमत हो जायेगी ?

बालक कुछ देर सोच कर बोला – तब तो ये और महंगा
बिकेगा लगभग 1000 रूपये का .

पिताजी – अगर मै इस लोहे से घड़ी के बहुत सारे स्प्रिंग
बना दूँ तो?

बालक कुछ देर गणना करता रहा और फिर एकदम से
उत्साहित होकर बोला ” तब तो इसकी कीमत बहुत
ज्यादा हो जायेगी.”

फिर पिताजी उसे समझाते हुए बोले – “ठीक इसी तरह
मनुष्य की कीमत इसमे नही है की अभी वो क्या है,
बल्की इसमे है कि वो अपने आप को क्या बना सकता है.”

बालक अपने पिता की बात समझ चुका था .

Friends अक्सर हम अपनी सही कीमत आंकने मे गलती कर
देते है. हम अपनी present status को देख कर अपने आप को
valueless समझने लगते है. लेकिन हममें हमेशा अथाह शक्ति
होती है. हमारा जीवन हमेशा सम्भावनाओ से भरा होता है. हमारी
जीवन मे कई बार स्थितियाँ अच्छी नही होती है पर इससे हमारी
Value कम नही होती है. मनुष्य के रूप में हमारा जन्म इस दुनिया
मे हुआ है इसका मतलब है हम बहुत special और important हैं .
हमें हमेशा अपने आप को improve करते रहना चाहिये और अपनी
सही कीमत प्राप्त करने की दिशा में बढ़ते रहना चाहिये."

एक लड़की की कठिन समय में सकरात्मक सूझ-बझ का परीचय!

बहुत समय पहले की बात है,
किसी गाँव में एक किसान
रहता था । उस किसान की एक
बहुत
ही सुन्दर
बेटी थी । दुर्भाग्यवश,
गाँव
के जमींदार से उसने बहुत सारा धन
उधार लिया हुआ था । जमीनदार
बूढा और कुरूप था । किसान
की सुंदर
बेटी को देखकर उसने
सोचा क्यूँ न कर्जे के बदले किसान के
सामने उसकी बेटी से
विवाह
का प्रस्ताव रखा जाये.जमींदार
किसान के पास गया और उसने
कहा – तुम
अपनी बेटी का विवाह
मेरे साथ कर दो, बदले में मैं
तुम्हारा सारा कर्ज माफ़ कर दूंगा ।
जमींदार की बात सुन
कर किसान
और किसान की बेटी के
होश उड़ गए

तब जमींदार ने कहा – चलो गाँव
की पंचायत के पास चलते हैं और
जो निर्णय वे लेंगे उसे हम
दोनों को ही मानना होगा ।
वो सब मिल कर पंचायत के पास गए
और उन्हें सब कह सुनाया.
उनकी बात
सुन कर पंचायत ने थोडा सोच विचार
किया और कहा- ये
मामला बड़ा उलझा हुआ है अतः हम
इसका फैसला किस्मत पर छोड़ते हैं .
जमींदार सामने पड़े सफ़ेद और काले
रोड़ों के ढेर से एक काला और एक
सफ़ेद रोड़ा उठाकर एक थैले में रख
देगा फिर लड़की बिना देखे उस थैले
से
एक रोड़ा उठाएगी, और उस आधार
पर उसके पास तीन विकल्प होंगे :
१. अगर वो काला रोड़ा उठाती है
तो उसे जमींदार से
शादी करनी पड़ेगी और
उसके
पिता का कर्ज माफ़ कर
दिया जायेगा.
२. अगर वो सफ़ेद पत्थर
उठती है
तो उसे जमींदार से
शादी नहीं करनी पड़ेगी और
उसके
पिता का कर्फ़ भी माफ़ कर
दिया जायेगा.
३. अगर लड़की पत्थर उठाने से
मना करती है तो उसके
पिता को जेल भेज दिया जायेगा।
पंचायत के आदेशानुसार जमींदार
झुका और उसने दो रोड़े उठा लिए ।
जब वो रोड़ा उठा रहा था तो तब
किसान की बेटी ने
देखा कि उस
जमींदार ने दोनों काले रोड़े
ही उठाये हैं और उन्हें थैले में
डाल
दिया है।
लड़की इस स्थिति से घबराये
बिना सोचने लगी कि वो क्या कर
सकती है, उसे तीन
रास्ते नज़र आये:
१. वह रोड़ा उठाने से मना कर दे और
अपने पिता को जेल जाने दे.
२. सबको बता दे कि जमींदार
दोनों काले पत्थर उठा कर
सबको धोखा दे रहा हैं.
३. वह चुप रह कर काला पत्थर उठा ले
और अपने पिता को कर्ज से बचाने के
लिए जमींदार से
शादी करके
अपना जीवन बलिदान कर दे.
उसे
लगा कि दूसरा तरीका सही है,
पर तभी उसे एक और
भी अच्छा उपाय
सूझा, उसने थैले में अपना हाथ
डाला और एक रोड़ा अपने हाथ में ले
लिया और बिना रोड़े की तरफ देखे
उसके हाथ से फिसलने का नाटक
किया, उसका रोड़ा अब
हज़ारों रोड़ों के ढेर में गिर
चुका था और उनमे
ही कहीं खो चुका था .लड़की ने
कहा – हे भगवान ! मैं
कितनी बेवकूफ
हूँ । लेकिन कोई बात नहीं .आप
लोग
थैले के अन्दर देख लीजिये कि कौन
से
रंग का रोड़ा बचा है, तब
आपको पता चल जायेगा कि मैंने
कौन सा उठाया था जो मेरे हाथ से
गिर गया.थैले में बचा हुआ
रोड़ा काला था, सब लोगों ने मान
लिया कि लड़की ने सफ़ेद पत्थर
ही उठाया था.
जमींदार के अन्दर इतना साहस
नहीं था कि वो अपनी चोरी मान
ले । लड़की ने
अपनी सोच से असम्भव
को संभव कर दिया ।


मित्रों, हमारे जीवन में
भी कई बार
ऐसी परिस्थितियां आ
जाती हैं
जहाँ सब कुछ धुंधला दीखता है,
हर
रास्ता नाकामयाबी की ओर
जाता महसूस होता है पर ऐसे समय में
यदि हम सोचने का प्रयास करें तो उस
लड़की की तरह
अपनी मुशिकलें दूर कर
सकते हैं ।   

Sunday, 27 April 2014

आप किस श्रेणी के साधक हैं ?

आप किस श्रेणी के साधक हैं ?

चार प्रकार के मिट्टी  के बर्तन होते हैं -


पहले  प्रकार के बर्तन के तले मे छिद्र  होते हैं।  आप उन बर्तनों में चाहे जितना पानी भरते जाएँ , परन्तु वह उनके भीतर रुकता नहि हैं। सारा जल बहार बह जाता है। इसी प्रकार के व्यक्ति , जब धर्म के विषय में  सुनते हैँ , तो उनके भीतर भी  कूछ  नहीं  ठहरता। वे एक कान से सुनते और दुसरे से बाहर निकाल देते हैं।

दूसरे प्रकार  के बर्तनों में दरारें होती हैं।  जब इन बर्तनों  में जल डाला जाता है, तो वह तुरन्त  बाहर नहीं निकलता और नहीं बहुत देर तक भीतर रूकता है।  वह धीरे धीरे रिसता रहता है , जब तक क बर्तन पुरा खाली  न हो जाए। यह उन व्यक्तियों की स्थिति है , जो सद्गुरु द्वारा दि गई धर्म-शिक्षाओं को सहेजने क प्रयास तो करते हैं , परन्तु उन पर दृढ़तापूर्वक चल नहि पाते।  फलतः धीरे धीरे उन्हें भूल बैठते हैं।

तीसरे    श्रेणी में वे बर्तन आते हैं , जो पहले से ही मलिन (गंदे ) जल से मुँह  तक भरे होते हैँ।  इसलिए उनमे ताजा -स्वच्छ  जल नहीं भर जा सकता।  ये वे व्यक्ति होतें हैं, जो अपने हि विचारोँ और धारनाओं मे इस कदर जकरे होते हैं कि सदगुरुं द्वारा दी गई धार्मिक शिक्षाओं को ग्रहण मे विफल  हैँ।  दुर्भाग्यवश उस ठहरे हुये मलिन जल से दूर्गंध उठने लगती है। कहने का भाव की ऐसे व्यक्ति  विकृत व मिथ्या विचारधाराओं और सिद्धांतोँ मे ही जीवन व्यतीत कर देते हैं।  ज्ञान - सुगन्धि से परिपूर्ण जीवन जीने मे असफल हो जाते हैं।

चौथी  श्रेणी बर्तनों मे न तो किसि प्रकार के छिद्र होते हैं और न ही दरारें।  उनमे मलिन जल की एक बून्द भी  नहि होती। इसलिए वे अपने में डाले गए  ताजे और स्वच्छ जल को पुर्ण रुप से सहेज पाते हैं। इस प्रकार के लोग सद्गुरु द्वारा दी गई धार्मिक शिक्षाओं के अनुरुप ही जीवन व्यतीत करते हैं और अपनी मंजिल को प्राप्त करते हैं।

                      -महात्मा बुद्ध 

-----विमल चन्द्र     

मेरी विचार - अपने आपको ऐसा पात्र बनाए कि ...........


"मेरी विचार "

(सहमत होंगे तो जरुर शेयर और अपनी राय कमेंट मे दे )
:------
ऐसे कुछ  लेने या पाने  लिये कुछ ऐसा पात्र होना चाहिए कि हम उसे रख सके,
अगर हमारे पास ऐसा पात्र नहीं हो तो हम कोई भी चीज लेकर भी  उसे ले नहीं पाएँगे , मतलब पात्र के अभावो में उसे रख नहीं पाएंगें।

ठीक इसी तरह हमारे और ईश्वर के  संन्दर्भ में भी  है.…
इश्वर हरदम हमे सबकुछ देने को तैयार है दुनिया कि हर चिज, पर हमारे पास उसे पाने के लिये उस प्रकार कि पात्रता हि नहीं है.……
इसलिए अगर हम आप और कोई भी ईश्वर से कुछ पाना चाहते हैं तो सर्व-प्रथम अपने आपको उसके  लायक बनाये ,
अपने आपको ऐसा पात्र बनाए  कि उस ईश्वर कि कृपा प्राप्त  कर सके।

आज के समाज के लोगों मे यही दुर्भाग्य है कि लोग सिर्फ़ ईश्वर से माँगने तक हि आपने आप को सीमीत रख लिये हैं , जबकि ईश्वर पहले से ही देने को तैयार हैं।
लोगों को तो अपने को उस के लायक यानि खुद को वैसा पात्र बनाने पे धयान देन चहिये, ताकि उसकी दि हुई कृपा को पा सके रख सके ग्रहन  कर सके।
और ऐसी पात्रता खुद को बनाने का आरम्भ  अच्छी सोच , चरित्र निर्माण  से शुरू होती है।

                                                                                                                   
                                                                                                         --------विमल  चन्द्र 


Friday, 25 April 2014

मेरी मन की आवाज :-

एक सवाल उस खुदा से
कौन हूँ मै?
क्यूँ हूँ मै?
खुद की तलाश मे
उदास हूँ मै
ये न जान कर अबतक
किसलिए बनाया है तू मुझे
गिरता सम्भलता खोज रहा हूँ
अस्तित्व मै अपना
तूने ईस दुनिया मे
बसाया है जिव अनेक
क्या राज है ईस दुनिया का
क्यूँ बनाया है तू ईसे
मुझसे तेरी ये नाराजगी कैसी
तेरी जवाब ना पाकर
उदास हूँ मै
उदास हूँ मैं ।।

-----विमल  चन्द्र 

मैं वो हूँ क्यूँ नहीं जैसा हूँ मैं वैसा।


झूठ बोलते थे फिर भी सच्चे थे हम,
ये उन दिनों की बात है जब बच्चे थे हम

आज सच्च कहते है फिर भी झूठे है हम,
सबको अपना  कहता हूँ फिर भी गैर है हम
ये यिन दिनों की बात है
जब बच्चे नहीं रह गए हम
फर्क हुआ है क्यूँ ऐसा
मैं वो हूँ क्यूँ नहीं
जैसा हूँ मैं वैसा।

                ------विमल चन्द्र